विद्यापति की रचनाओं में गहरे नागिरक बोध की झलक
दरभंगा, जुलाई 7 -- राजीव रंजन झा,दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर साहित्य विभाग सभागार में सोमवार को अभिज्ञान व्याख्यानमाला के तहत काव्येतर विद्यापति : पुरुष-परीक्षा आ लिखनावली मे मिथिलाक समाज, राज्य आ नागरिक-बोध विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्राचार्य प्रो. कमलानंद झा ने महाकवि विद्यापति की काव्येतर रचनाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यापति केवल श्रृंगार या भक्ति के कवि नहीं थे, बल्कि उनकी रचनाओं में तत्कालीन मिथिला समाज, राज्य व्यवस्था और गहरे नागरिक बोध की झलक मिलती है। जो बातें आधुनिक विद्वानों ने 20वीं सदी में कहीं, वे सारी बातें विद्यापति सदियों पहले अपनी रचनाओं से कह चुके थे।
कार्यक्रम का विवरण उन्होंने कहा कि विद्यापति ने ...
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