प्रभात कुमार, मार्च 12 -- उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए देश में पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी। इस फैसले के साथ 13 साल से मरणासन्न स्थिति में जी रहे ‌गाजियाबाद के 32 वर्षीय हरीश राणा के कृत्रिम जीवन रक्षक उपकरण हटाकर उसे कष्ट से मुक्त करने का रास्ता साफ हो गया। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने दिल्ली स्थित एम्स में डॉक्टरों की देखरेख में हरीश राणा के कृत्रिम जीवन रक्षक उपकरण हटाने की अनुमति दी ताकि उसका सम्मान बना रहे। पीठ ने एम्स को हरीश को पैलिएटिव केयर में भर्ती करने निर्देश दिया। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह सभी प्रक्रिया मानवीय तरीके से की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने युवक के माता-पिता, मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की इज...