प्रयागराज, मई 23 -- प्रयागराज, संवाददाता। एनसीजेडसीसी की आयोजित विमर्श कार्यक्रम की कड़ी में शनिवार को इविवि में संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. हरिदत्त शर्मा ने विचार व्यक्त किए। निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय और कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।प्रो. शर्मा ने कहा कि मेरी शोध यात्रा जर्मनी से शुरू हुई। मुझे विदेशों में भी भारतीय साहित्य और संस्कृत ग्रंथों के प्रति गहरी रुचि देखने को मिली। विदेशी विद्वानों ने भारतीय संस्कृति और वेदों के अध्ययन को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि 1990 में इंडो-फ्रेंच कल्चरल एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत फ्रांस यात्रा के दौरान उनकी इस दुर्लभ पांडुलिपि से जुड़ने की शुरुआत हुई। यह भी पढ़ें- विदेशी लेखकों में दिखी साहित्य-संस...