नई दिल्ली, मार्च 29 -- आलोक जोशी,वरिष्ठ पत्रकार दुनिया की राजनीति और आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी के बीच दूरी उतनी नहीं है, जितनी अक्सर समझी जाती है। ईरान युद्ध ने यह बात फिर से साफ कर दी है। तेल और गैस की आपूर्ति अटकने का असर सीधे रसोई, जेब और रोजगार तक पहुंचता है। इसलिए प्रश्न केवल यह नहीं है कि बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस संकट का किस तरह हल निकाल रही हैं, बल्कि यह भी है कि इसका असर भारत के आम नागरिक पर कैसे पड़ रहा है और इससे निपटने की क्या संभावनाएं हैं? गुजरे शुक्रवार को केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपये से घटाकर तीन रुपये कर दिया, जबकि डीजल में 10 रुपये की कमी करते हुए उसे शून्य कर दिया। इस फैसले का उद्देश्य बढ़ती वैश्विक कीमतों के असर से देश के लोगों को बचाना और घरेलू बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित र...