हल्द्वानी, जून 3 -- दीक्षा बिष्ट लमगड़िया हल्द्वानी। यूओयू के प्रशासनिक और अकादमिक ढांचे को अधिक पारदर्शी, कुशल व सुदृढ़ बनाने के लिए बुधवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र की ओर से एक क्षमता वर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य विषय संस्थागत वित्तीय प्रबंधन: बिल प्रस्तुतीकरण, लेखा परीक्षा और आपत्ति निराकरण था।निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता डॉ. एके दीक्षित (पूर्व उपनिदेशक, स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग) ने बिलों के सही प्रस्तुतीकरण और ऑडिट के तकनीकी पहलुओं को समझाया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में नियमों की सटीकता जरूरी है। यदि शुरुआत में ही गाइडलाइंस का पालन हो, तो ऑडिट आपत्तियों से बचा जा सकता है। उन्होंने वित्तीय साक्षरता और ...