भभुआ, अप्रैल 22 -- भभुआ। भूगोल शास्त्र के प्राध्यापक सोनू सिन्हा कहते हैं कि हवा को प्रदूषित बनाने में ओजोन का भी अहम रोल है। वाहन, बिजली संयंत्र, औद्योगिक बॉयलर, रिफाइनरियां, रासायनिक संयंत्रों और अन्य स्रोतों से उत्सर्जित होकर सूर्य के प्रकाश से प्रतिक्रिया करता है और हवा को प्रदूषित बना देता है। इस वजह से सांस लेने में कठिनाई होती है। अस्थमा के मरीज, बच्चे और बुजुर्ग के साथ बाहर काम करने वालों के लिए यह खतरनाक होता है। इन बीमारियों की चपेट में आ रहे लोग भभुआ। सदर अस्पताल के डॉ. त्रिभुवन नारायण कहते हैं कि हवा में प्रदूषण की मात्रा बढ़ने से सबसे पहले श्वसन तंत्र पर अटैक होता है। यह भी पढ़ें- आसमान से बरस रही आग, 42 डिग्री सेल्सियस पहुंचा पारा इससे आंखों में खुजली और जलन, नाक में सूखापन और खुजली, गले में खराश, खांसी, दमा या सांस लेने में ...
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