नई दिल्ली, अक्टूबर 22 -- लद्दाख प्रशासन ने सोनम वांगचुक के संस्थान को जमीन देने का फैसला रद्द करने के अपने कदम का हाईकोर्ट में बचाव किया। प्रशासन ने वांगचुक पर कानून की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि संस्थान को जमीन का पट्टा अपने आप समाप्त हो गया था, क्योंकि उसने जरूरी शुल्क जमा नहीं किया और पट्टे के दस्तावेज भी तय समय में नहीं बनवाए। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में दायर एक हलफनामे में, प्रशासन ने कहा कि फ्यांग थांग में 1,076 कनाल और 1 मरला जमीन के लिए दिया गया 40 साल का लीज आवंटन 5 मई 2019 को 'कानूनी रूप से समाप्त' हो गया था। यह भी पढ़ें- भारत लद्दाख के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रहा है; केंद्र पर क्यों भड़के सोनम वांगचुक? ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि 'हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग' (एचआईएएल) तय एक साल की अवधि में न तो लीज ...