सिमडेगा, मार्च 23 -- सिमडेगा। वर्ष 2025 में जिले में 971 यक्ष्मा के रोगियों को चिह्नित किया गया है। सभी मरीजों को दवा उपलब्ध करा दिया गया है। डीटीओ डॉ सिलवंत एक्का ने बताया कि टीबी एक घातक संक्रामक बीमारी है। जो माइक्रो बैक्ट्रीयम ट्यूबर क्युलेसिस नामक वैक्टीरिया के कारण फैलता है। यक्ष्मा शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। जब यह छाती को प्रभावित करता है, तो इसे फेफड़े की टीबी कहा जाता है। यक्ष्मा के कीटाणु हवा के माध्यम से फैलते हैं। यक्ष्मा के कीटाणु हवा में छोटे-छोटे वायुकणों के रूप में फैल जाते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिदिन 40,000 से अधिक व्यक्ति टीबी के कीटाणु से संक्रमित होते हैं। उन्होंने बताया कि टीबी की शंका बलगम के साथ तीन सप्ताह अथवा अधिक दिनों से लगातार खांसी का होना, छाती में दर्द, बलगम के साथ खून का आना, शाम के ...