चित्रकूट, मार्च 21 -- चित्रकूट। संवाददाता भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद की ओर से दर्शन परिषद के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन हो गया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में भारतीय बौद्ध शोध संस्थान की अगुवाई में इसका आयोजन हुआ। आखिरी दिन तकनीकी सत्र में नौ शोधपत्रों को वाचन किया गया। लखनऊ विश्वविद्यालय से आए डा प्रशांत शुक्ल ने कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।हिंदू विश्वविद्यालय बनारस से आए प्रो बृजभूषण ओझा ने भारतीय दृष्टि से गुरु-शिष्य परंपरा की व्याख्या करते हुए वर्तमान परिपेक्ष्य में इसकी प्रासंगिकता को स्पष्ट किया। कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि गंगा की तरह विभिन्न विचार दर्शन को समृद्ध करते हैं। शास्त्र परंपरा नयापन लाती है और दर्शन शास्त्री हमेशा दर्शन के रूप में जिंदा रहते हैं। भारतीय व...