नई दिल्ली, अक्टूबर 20 -- विजयादशमी के दिन देवी अपराजिता का पूजन किया जाता है। देवी अपराजिता की पूजा का आरंभ देवासुर संग्राम के समय हुआ था। नव दुर्गाओं ने तब दानवों का संपूर्ण नाश किया था। इसके बाद मां दुर्गा अपनी मूल आदि शक्ति अपराजिता की आराधना करने के लिए शमी की पत्तियां लेकर हिमालय में अंतर्धान हो गई थीं। विजयादशमी के दिन शमी के वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व है। पहले विजयादशमी पर्व देवासुर संग्राम में देवताओं की दानवों पर विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता था, लेकिन इसके बाद त्रेता युग में राम की रावण पर जीत की खुशी में विजयादशमी का पर्व मनाया जाने लगा। अपराजिता का अर्थ है 'जो कभी पराजित न हो'। ऐसा कहा जाता है कि यह देवी शक्ति की संहारकारी और रौद्र शक्ति है, इनसे भगवान श्रीराम को रावण पर विजय पाने की शक्ति मिली। शस्त्र पूजा से पहले अपरा...