देहरादून, जुलाई 9 -- देहरादून। प्रमुख संवाददाता पिछले 25 वर्षों में उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं के लिए 46 हजार हेक्टेयर से अधिक वन भूमि हस्तांतरित की गई है। इनमें सबसे अधिक 47 प्रतिशत वन भूमि हस्तांतरण अकेले देहरादून जिले में हुआ। जबकि राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में देहरादून की हिस्सेदारी केवल छह प्रतिशत है। पर्यावरणविदों ने चिंता जताते हुए इसे पर्यावरणीय संतुलन के लिए खतरनाक बताया।जानकारी के अनुसार, सड़क, खनन और अन्य विकास कार्यों के लिए औसतन प्रतिदिन करीब पांच हेक्टेयर वन भूमि का हस्तांतरण हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि देहरादून घाटी पहले ही 1980 के दशक में चूना पत्थर खनन से गंभीर पर्यावरणीय क्षति झेल चुकी है और वर्ष 1989 में इसे देश के शुरुआती पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल किया गया था। यह भी पढ़ें- Dehradun New...