हापुड़, मार्च 15 -- वक्फ व्यवस्था इस्लामी परंपरा में दान और समाज सेवा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रणाली है, जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को स्थायी रूप से धार्मिक या परोपकारी कार्यों के लिए समर्पित कर देता है। ऐसी संपत्ति को वक्फ कहा जाता है और उसका उपयोग मस्जिद, मदरसा, कब्रिस्तान, शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबों की सहायता जैसे कार्यों में किया जाता है। वक्फ घोषित होने के बाद संपत्ति को बेचा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।लोकपाल अनुराधा वर्मा ने बताया कि भारत में वक्फ कानून समय-समय पर विकसित हुआ है। वर्ष 1913 में मुस्लिम वक्फ वैधता अधिनियम के तहत पारिवारिक वक्फ को कानूनी मान्यता मिली। इसके बाद 1954 में वक्फ अधिनियम लागू हुआ, जिसके अंतर्गत राज्य वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद की स्थापना की गई। वर्ष 1995 में वक्फ प्रबंधन को मजबूत बनाने के लि...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.