विधि संवाददाता, मार्च 2 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक आपराधिक अपील को निर्णीत करते हुए में कहा है कि मात्र इसलिए कि एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर वकील की सहायता से तैयार की गई है, उसे झूठा नहीं माना जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान व न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने प्रतापगढ़ के जगदम्बा हरिजन की अपील पर पारित किया है। सत्र न्यायालय ने अपीलार्थी को दो महिलाओं पर एसिड हमले कर गैर इरादतन हत्या करने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। अपीलार्थी की ओर से मुख्य रूप से यह तर्क था कि एफआईआर दो दिन बाद दर्ज की गई थी और वह भी एक निजी वकील की सहायता से तैयार की गई थी, इसलिए यह रिपोर्ट असत्य है। हालांकि न्यायालय ने इस दलील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि एफआईआर का वकील की सहायता से तैयार होना, उसकी विश्वसनीयता को अपन...