नई दिल्ली, मई 4 -- सुहेल हामिद नई दिल्ली। ठीक छह माह पहले कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने अपने एक लेख में वंशवाद की राजनीति को भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा बताया था। उस वक्त उन्हें यह अहसास नहीं होगा कि चार नवंबर 2025 को कही हुई उनकी बात चार मई 2026 को सही साबित हो जाएगी। नतीजे बता रहे हैं कि पांच राज्यों के चुनाव में मतदाताओं को वंशवाद की राजनीति रास नहीं आई। यह भी पढ़ें- जनादेश 2026: असम::गौरव गोगोई की राज्य की राजनीति में पहली पारी हार के साथ समाप्तमतदाताओं का वंशवाद के प्रति रुख तमिलनाडु, असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव में मतदाताओं ने वंशवाद को नकार दिया। इससे पहले मतदाता महाराष्ट्र में बाला साहेब ठाकरे और शरद पवार की वंशवाद की राजनीति के खिलाफ वोट कर चुके हैं। ओडिशा में पटनायक परिवार की हार भी भारतीय लोकतंत्र और राजनीति में परिवारव...