सीवान, अप्रैल 13 -- (सीवान से नीरज कुमार पाठक)। वंदे मातरम राष्ट्र जागृति का महामंत्र है, जो हमारी धमनियों में ऊर्जा का संचार करता है। जिसके वशीभूत होकर मां भारती के सैकड़ों लाडलों ने समय समय पर अपना सर्वस्व बलिदान दे दिया। वंदे मातरम् के प्रभाव को खंडित करने का 1923 से ही प्रयास किया गया। जिसकी अंतिम परिणति 24, जनवरी 1950 को हुई। जब इसे विस्थापित कर इसे राष्ट्र गान का दर्जा से विस्थापित किया गया। तुष्टीकरण की यह पराकाष्ठा थी। नई पीढ़ी में जोश और ऊर्जा भरने के लिए वंदे मातरम् का गायन अत्यंत आवश्यक है। ये बातें मुख्य वक्ता के तौर पर प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्र सह संयोजक विमर्श आयाम डॉ. अशोक प्रियंवद ने प्रज्ञा प्रवाह की सीवान इकाई द्वारा आयोजित स्नेह मिलन कार्यक्रम में कही। संगठन गीत व वंदे मातरम् का गायन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी ...
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