जमुई, अक्टूबर 27 -- सोनो, रजनीकांत/निज संवाददाता लोक आस्था का महापर्व छठ, यह महज त्यौहार ही नहीं बल्कि हमारी सनातन रूपी संस्कृति व संस्कारों का धरोहर भी है। छठ ही एक ऐसा त्यौहार जिसमें डूबते सूर्य के अर्ध्य समर्पित कर उपासना के बाद ही उगते सूर्य की आराधना की जाती है। उदयाचल सूर्य की उपासना के पूर्व अस्ताचल सूर्य की आराधना की अनोखी परंपरा समाज को यह संदेश देती है, कि समाज में फैल रहे भेद- भाव, छुआछूत, उच नीच जैसे सामाजिक कुरीतियों को समाप्त कर समरस समाज के निर्माण की ओर अग्रसर होने का। इसलिये तो छठ को मात्र एक त्यौहार तक सीमित नहीं रखा जा सकता है,यह हमारे समाज के संस्कृति व संस्कार की एक पहचान भी है। छठ बिहार प्रदेश के अस्मिता की पहचान भी है। इस त्यौहार का उद्गम स्थली भी बिहार ही माना गया है। छठ महापर्व के इसी खूबसूरती के वजह से छठ की छटा ...
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