अयोध्या, मई 3 -- अयोध्या। अन्तर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निदेशक डा संजीब सिंह बताते हैं कि रामायण की प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के इस अभियान में एक से बढ़कर एक साहित्य सेवियों से मुलाकात हो रही है, जिसके अनुभव बड़े रोचक है। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश के एक ऐसे लेखक से भेंट हुई जिन्होंने बताया है कि उनमें लिखने का ऐसा जुनून है कि वह श्रीराम चरित मानस को अब तक 25 बार लिख चुके हैं। उनकी इच्छा है कि उनकी हस्त लिखित वह 25 मानस की प्रतियां भी राम मंदिर में संरक्षित हो जाएं।
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