वाराणसी, अक्टूबर 4 -- वाराणसी। आचार्य रामचंद्र शुक्ल की जयंती पर रविवार सुबह युवा शोधार्थियों और लेखकों ने नागरी प्रचारिणी सभा का भ्रमण किया। यहां उन्होंने आचार्य शुक्ल के सर्जनात्मक अवदान को रेखांकित करनेवाली दीर्घा देखी। आचार्य शुक्ल की कृति 'आदर्श जीवन' के हवाले से उनकी सृजनात्मक यात्रा को समझने का प्रयास किया। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने लेखन के माध्यम से यह भी सुनिश्चित किया कि युवाओं के अंतःकरण में उत्तम संस्कार उत्पन्न करना कितना अनिवार्य है। सभा की पुस्तकों के संपादक द्वय तापस शुक्ल और आकाश देववंशी ने आगतों को दीर्घाओं की विशिष्टताओं से परिचित कराया। यह भी पढ़ें- हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष हैं आचार्य शुक्ल

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