मुजफ्फरपुर, अप्रैल 10 -- मुजफ्फरपुर हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र मुशहरी के वैज्ञानिकों ने शाही और चाइना के बाद अब गंडकी संपदा लीची विकसित की है। इसे बेदाना लीची भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने पहले इसपर शोध किया। सफलता मिलने के बाद पौधा तैयार किया गया। किसान लीची अनुसंधान केन्द्र से इस लीची का पौधा प्राप्त कर सकते हैं। शाही व चाइना के बाद तैयार होती है गंडकी संपदाराष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. विकास दास ने बताया कि गंडकी संपदा शाही और चाइना के बाद तैयार होने वाली किस्म है। शाही लीची 20 मई तक तैयार होती है। चाइना लीची दो जून तक और गंडकी संपदा लीची 15 जून के बाद तैयार होती है।शाही व चाइना की तुलना में ज्यादा मीठानिदेशक ने बताया कि गंडकी संपदा लीची के फल का वजन 55 ग्राम तक हो सकता है। शाही और चाइना ली...
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