लिव-इन रिश्तों में नाइंसाफी रोकने की वाजिब पहल
नई दिल्ली, अगस्त 4 -- कमलेश जैन,अधिवक्ता, सुप्रीम कोर्ट सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि लिव-इन रिश्ता आज के समाज की एक सच्चाई है। अब भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (भारतीय न्याय संहिता की धारा 85) के तहत पुरुष साथी ही नहीं, बल्कि उनके रिश्तेदारों पर भी मुकदमा चलाया जा सकता है। जहां भी दो युगल विवाहित की तरह रह रहे हैं, उनके मामले में क्रूरता होने पर इस धारा में मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। न्यायमूर्ति संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि क्रूरता इस बात की परवाह नहीं करती कि घर में शादीशुदा महिला है या 'लिव-इन' साथी। यह कानून हर 'लिव-इन' रिश्ते पर लागू नहीं होगा, बल्कि केवल उन्हीं मामलों में लागू होगा, जहां इरादा शादी करने का था। शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि ऐसे में अर्नेश कुमार बनाम बिहार सरकार मामले में दिए गए गि...
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