पीटीआई, अगस्त 20 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि आपसी सहमति से बालिगों का लिव-इन रिलेशनशिप शादी के जैसा ही है और न ही माता-पिता और न ही दोस्त उनकी पसंद में दखलअंदाजी कर सकते हैं या उनकी जान को खतरा पहुंचा सकते हैं। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने इस मामले में लड़की के घरवालों की तफर से मिल रही धमकियों पर ध्यान देते हुए प्रेमी जोड़े को पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सहमति से साथ रह रहे जोड़े को किसी की भी दखलअंदाजी के बिना अपनी पसंद के साथी को चुनने उसके साथ रहने का पूरा अधिकार है।कोर्ट ने कहा - पहचान को छीनने जैसा जज ने जोड़े की याचिका पर 13 अगस्त को आदेश जारी करते हुए कहा कि बालिगों के बीच आपसी सहमति से होने वाली शादियों को जाति, पंथ, रंग, धर्म या आस्था से अलग मान्यता द...