नई दिल्ली, अगस्त 3 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसले में कहा कि 'शादी जैसे' लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुषों के खिलाफ भी दहेज उत्पीड़न/प्रताड़ना का मुकदमा चलाया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 'शादी जैसे' लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को आईपीसी की धारा 498ए (नए कानून बीएनएस की धारा 85) के तहत सुरक्षा से बाहर रखना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण होगा। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने आईपीसी की धारा 498ए का दायरा बढ़ाते हुए यह फैसला दिया। आईपीसी की धारा 498ए पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा दहेज उत्पीड़न या किसी भी तरह की शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न से संबंधित है। पीठ ने कहा कि 'लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष पर आईपीसी की धारा-498, (नए कानून बीएनएस की धारा 85) के तहत घरेलू क्रूरता का मुकदम...