वाराणसी, फरवरी 1 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। बनारस लिट् फेस्ट के पुस्तक चर्चा सत्र में लेखिका सिंजिनी कुमान ने महिलाओं के जीवन, लेखन, स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारियों पर खुलकर संवाद किया। कुमान ने अपनी पुस्तक 'घुमक्कड़ औरत' का उल्लेख करते हुए कहा कि यह किताब महिलाओं की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। सौरभ चक्रवर्ती के साथ संवाद में उन्होंने कहा कि बनारस शहर का अर्थ केवल स्थान नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और अवसर की भावना है। चर्चा के दौरान स्वतंत्रता बनाम निर्भरता, महिला-केंद्रित पुस्तकों की आवश्यकता, बच्चों के पोषण की साझा जिम्मेदारी और समाज में संतुलन जैसे विषयों पर सवाल-जवाब हुए। हिंदी माध्यम से पढ़ी सिंजिनी कुमान ने कहा कि वे हिंदी में लिखना पसंद करती हैं क्योंकि यह उनकी संवेदनाओं के सबसे निकट है। सत्र का निष्कर्ष यह रहा कि महि...