बांका, जुलाई 1 -- बांका, राजदीप सिंह। हर ठोकर नया सबक सिखाती है, संघर्ष की राह ही सफलता दिलाती है। प्रस्तुत पंक्तियों को अपने जीवन में उतार कर संघर्ष की राह पर चलते हुए एक ही गांव की करीब 40 महिलाएं अपनी कार्य कुशलता का लोहा सूबे में मनवा रहीं हैं। जिससे आत्मनिर्भर भारत की भावना को गांव-गांव तक पहुंचाने में महिलाओं की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

महिलाओं की मेहनत जिले के दोमुहान पंचायत अंतर्गत मंजिरा गांव की हेमलता देवी ने लाह की रंग-बिरंगी चूड़ियां, लहठी तथा शादी-ब्याह में उपयोग होने वाले मोर और मुकुट बनाने के हुनर से न केवल अपनी आजीविका को नई दिशा दी है, बल्कि आसपास की करीब 40 महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। दरअसल हेमलता देवी ने वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान रेशम धागा चूड़ी एवं कच्चे...