नई दिल्ली, मई 19 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लावारिस कुत्तों पर सुनवाई के दौरान अपने फैसले में कहा कि लावारिस कुत्तों को हर जगह रहने का अधिकार नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि लावारिस कुत्तों के पास, किसी भी जगह की प्रकृति और उसके इस्तेमाल की परवाह किए बिना, हर तरह की जगह पर रहने का कोई 'अटल या पूर्ण अधिकार' नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि लावारिस कुत्तों के मानवीय प्रबंधन के लिए बने कानूनी ढांचे की यह व्याख्या नहीं की जा सकती कि वह संवेदनशील संस्थागत जगहों पर हमेशा रहने का अधिकार देता है। सुप्रीम कोर्ट ने उन दलीलों को सिरे से ठुकरा दिया, जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक संस्थानों के अंदर पाए जाने वाले लावारिस कुत्तों को 'गली के कुत्ते' या ‌'सामुदायिक कुत्ते'‌ माना जा सकता है, ताकि वे नियमों के तहत दोबारा छोड़े जाने के हकदार हों। कानून...