कानपुर, मार्च 10 -- कानपुर, वरिष्ठ संवाददाता। हजरत अली की शहादत पर मजलिसों का सिलसिला जारी है। शहर में करीब दस स्थानों पर मजलिसें हुईं और ताबूत व अलम जुलूस निकाले गए। नवाब दूल्हा पटकापुर में लाल रोशनी में रात में मजलिस हुई। अंजुमन बज्म ए हुसैनी ने सकेरा इस्टेट तो अंजुमन खुद्दामुल मुस्लिमीन ने सकेरा इस्टेट में मजलिस की। इस दौरान मौला अली की सदाएं गूंजती रहीं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई को भी सभी मजलिसों में खिराजे अकीदत पेश किया गया। कामयाबी के लिए दुआएं हुईं। अंजुमने बज्म ए हुसैनी ने अनवरगंज सकेरा स्टेट में हज़रात अली की यौमे शहादत पर मजलिस की और फिर ताबूत व अलम उठाए। जाकिर ने कहा कि हज़रात अली हुकूमत के ख़ज़ाने का पैसा अपने या अपने परिवार पर खर्च नहीं करते थे। वह स्वयं खेती करते और परिवार का खर्च पूरा करते थे। जो हजरत अली के न...