नई दिल्ली, मार्च 31 -- नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि रेल दुर्घटनाओं के मामलों में पीड़ित की लापरवाही मुआवजा देने से मना करने का आधार नहीं हो सकती। उच्च न्यायालय ने कहा कि एक बार जब कोई अप्रत्याशित घटना साबित हो जाती है तो रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत रेलवे की जिम्मेदारी और अधिक बन जाती है कि पीड़ित को मुआवजा दिया जाए। न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने यह टिप्पणी एक महिला की अपील को मंज़ूरी देते हुए की। इस महिला के मुआवजे के दावे को रेलवे दावा अधिकरण ने खारिज कर दिया था। अधिकरण ने यह माना था कि मृतक न तो एक वास्तविक यात्री था और न ही किसी अप्रत्याशित घटना का शिकार हुआ था। यह मामला अपीलकर्ता के बेटे की मौत से जुड़ा था। आरोप है कि वर्ष 2018 में तुगलकाबाद से पलवल जाते समय लड़का चलती ट्रेन से गिर गया थ...
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