वरिष्ठ संवाददाता, दिसम्बर 31 -- मकर संक्रांति के दौरान आंध प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों से मुर्गों की खूनी लड़ाई के खेल की खबरें और उस पर रोकथाम की खबरें आने लगती हैं। लड़ाकू मुर्गों की परवरिश खास तरीके से की होती है। बरेली के धौरेरामाफी गांव के खान साहब की पहचान उनके खास मुर्गों से है। मुरादाबाद के रहने वाले खान साहब कई वर्षों से बरेली में फाइटिंग मुर्गों (Cockfighting Roosters) को ही तैयार करने का काम कर रहे हैं। खान साहेब का शौक समय के साथ रोज़गार में बदल गया। अब उनके पास पल रहे कुछ मुर्गों की कीमत सुनकर लोग हैरान रह जाते हैं। ये मुर्गे सिर्फ लड़ते नहीं, बल्कि जीत के साथ लाखों रुपये कमाते हैं। खान साहब बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें मुर्गे पालने का शौक था। गांव के माहौल में यह शौक आम बात थी। जब उन्हें पता चला कि कई जगहों पर मुर्गों की...