नई दिल्ली, जनवरी 3 -- हमारे देश में बहुत सारे लोगों, खासकर राजनेताओं को इस बात का बड़ा गुमान रहता है कि उन्होंने न जाने कितने भारतीयों की जिंदगी संवार दी। दर-हकीकत, वे समूचे सिस्टम के काम का सेहरा अपने सिर सजाने की कोशिश करते रहते हैं और सरमायेदारों की एक पूरी फौज उनके दावों की मुनादी करती रहती है। ऐसे में, जब चेतना गाला सिन्हा जैसे जमीनी लोगों के काम सामने आते हैं, तब यह एहसास होता है कि हमारे सियासतदां इन लोगों के आगे कितने बौने हैं! आज से करीब 68 साल पहले मुंबई के एक सुशिक्षित, आर्थिक रूप से सक्षम परिवार में चेतना पैदा हुईं। महानगरीय सुविधाओं के बीच पली-बढ़ी चेतना को बचपन से ही बेहतर शिक्षण संस्थानों में पढ़ने का मौका मिला। 1980 के दशक की शुरुआत में जब वह बॉम्बे यूनिवर्सिटी की कॉमर्स स्नातक की छात्रा थीं, तभी उनकी मुलाकात प्रसिद्ध गांध...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.