बलिया, फरवरी 3 -- बलिया, संवाददाता। सरकार छुट्टा पशुओं को संरक्षित कर उनको खिलाने-पिलाने के लिए हर महीने भले ही लाखों रुपये खर्च कर रही है। लेकिन किसान अपनी फसल बचाने के लिए रतजगा करने को लाचार हैं। यह छुट्टा पशु आए दिन शहर से लगायत कस्बा और गांव के चट्टी-चौराहों पर जाम का झाम और सड़क दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह भी बन रहे हैं। 'हिन्दुस्तान' टीम ने मंगलवार को कुछ इलाकों की पड़ताल किया। इस दौरान छुट्टा मवेशी फसलों को चरने के साथ ही धमा चौकड़ी मचाकर बर्बाद करते दिखे। वहीं किसानों से बातचीत करने पर बताया कि वह दिन-रात खेतों की रखवाली को मजबूर हैं। यह स्थिति तब है जब जिले में तीन वृहद, कान्हा समेत 30 गो आश्रय स्थल हैं, जिनमें वर्तमान में 2472 मवेशी संरक्षित हैं और इन्हें खिलाने के लिए सरकार हर महीने करीब 37 लाख रुपये खर्च कर रही है। बेल्थरारोड हि...
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