नई दिल्ली, जुलाई 23 -- हमारे समाज में कामयाबी की एक बहुत ही सीधी सी तस्वीर बनी हुई है। देश के किसी बड़े और नामी इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की डिग्री लो, किसी मल्टीनेशनल कंपनी में लाखों का पैकेज क्रैक करो, और फिर आराम से किसी विदेशी शहर में सैटल हो जाओ। ज्यादातर युवाओं का यही सपना होता है और वो इसी रास्ते पर आंख मूंदकर चलते भी हैं। लेकिन क्या होता है जब ये सब कुछ हासिल करने के बाद भी अंदर से वो सुकून ना मिले जिसकी आपको तलाश थी? कैप्टन अमर सिन्हा यादव की कहानी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने वो सब कुछ पा लिया था जिसके लिए लोग दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन फिर उन्होंने अपनी जिंदगी की गाड़ी का गियर ऐसा बदला कि हर कोई बस देखता रह गया। आईआईटी से लेकर L&T की कॉर्पोरेट नौकरी, फिर वहां से इंडियन आर्मी की वर्दी और अब आईआईएम कलकत्ता तक का उनका ये सफर किसी भ...