लाइसेंसधारी का दायित्व है कि वह खरीदे गए कारतूसों का रखे हिसाब, हर्ष फायरिंग पर हाई कोर्ट की टिप्पणी
प्रयागराज, अगस्त 1 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि लाइसेंसी असलहा का इस्तेमाल शादी, धार्मिक आयोजनों या किसी भी प्रकार की हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक शस्त्र लाइसेंसधारी का दायित्व है कि वह खरीदे गए कारतूसों और उनके उपयोग का पूरा रिकॉर्ड रखे। ऐसा नहीं करने पर शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने अखिलेश कुमार की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याची ने याचिका में शस्त्र लाइसेंस रद्द करने के लाइसेंसिंग प्राधिकारी और अपीलीय प्राधिकारी के आदेश को चुनौती दी थी। याची को वर्ष 2000 में शस्त्र लाइसेंस जारी किया गया। वर्ष 2019 में निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उससे खरीदे गए और उपयोग किए गए कारतूसों का विवरण मांगा। जांच मे...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.