विधि संवाददाता, मार्च 31 -- UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति बालिगों की अपनी पसंद से की गई शादी (प्रेम विवाह) को सम्मान का मुद्दा नहीं बना सकता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य का दायित्व है कि वह दंपति के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा करे, भले ही खतरा उनके अपने परिवार से ही क्यों न हो। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें अपनी पसंद से शादी करने वाले जोड़े ने अपनी सुरक्षा की मांग की। दोनों ने अपनी मर्जी से आर्य समाज मंदिर में विवाह किया था और उनके पास वैध विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र भी था। याचियों ने अदालत को बताया कि महिला के परिवार वाले इस शादी के खिलाफ हैं और उन्होंने झूठा आपराधिक मामला दर्ज करा दिया। दंपति ने संयुक्त हलफनामा दाखिल...
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