लड़का-लड़की का साथ घूमना कब से अपराध? सारे निठल्ले कैसे बन गए समाज के ठेकेदार
नई दिल्ली, सितम्बर 24 -- आपने अक्सर सोशल मीडिया पर एक मीम देखा होगा। मीम में एक लड़की कहती है कि अगर मैं डिप्रेशन में भी जाना चाहूं तो घरवाले कहते हैं जाओ बेटी, पर 7 बजे से पहले घर वापस आ जाना। इस मीम को देखकर हम हंसते भी हैं। लेकिन क्या ये सच नहीं कि ये हर घर की कहानी है? बेटियों पर बंदिशें सदियों पर लगती आई हैं। कहां जाना है, कितने बजे जाना है और क्या पहनकर जाना है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर इतने सालों से शासन के नाम पर हमने जो किया, उसका फायदा क्या हुआ? क्या बिहार के जमुई में किसी लड़की के साथ यौन उत्पीड़न इसीलिए नहीं हुआ क्योंकि वह एक लड़के के साथ बाहर थी? या देश की राजधानी में पार्क में बैठी लड़की के साथ बलात्कार नहीं हुआ? दुर्भाग्यवश इन सवालों के जवाब हां हैं। तो अब सवाल को दूसरे तरीके से पूछते हैं। लड़कियों पर लाख बंदिशें तो लगा दी ...
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