लग्न और वट-सावित्री पुजा के बाद मंदा पड़ा बांस निर्मित सामग्री का बाजार
जमुई, मई 17 -- जमुई, एक प्रतिनिधि अपने पूर्वजों से सीखी कला के माध्यम से जीवनयापन कर रहे सूप-दउरा बनाने वाले लोगों की रोजी-रोटी संकट में है। दूर से बांस व अन्य सामान लाकर दिन-रात पूरा परिवार लगकर इसे तैयार कर रहा, मगर इससे घर चलाना मुश्किल हो रहा है। थोक विक्रेता भी अब यहां से सूप-दउरा नहीं लेते। वे दूसरे राज्यों से इसे मंगवाकर बेच रहे हैं। यह दर्द है जमुई जिले में विभिन्न प्रखंडों में बसे लगभग चार हजार से अधिक परिवार के लोगों की, जिनका मुख्य पेशा ही सूप-दउरा, चंगेरा से लेकर तीज-त्योहार के लिए बांस के बर्तन बनाना है। यहां के एक हजार से अधिक परिवार के लोग नारियल के झाड़ू का निर्माण करते हैं। वहीं तीन हजार से अधिक घरों के लोग सूप-दउरा बनाकर जीवनयापन करते हैं।
सूप-दउरा बनाने में चुनौतियाँ सूप-दउरा तैयार करने वाले भोनू , सुमित्रा देवी, कांता ...
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