नई दिल्ली, सितम्बर 19 -- 12 साल की उम्र थी और दिन रविवार का था। खबर मिली की पिता जी का रोड एक्सीडेंट हो गया। वो एक पीसीएस अधिकारी थे। रविवार होने के बावजूद भी उनके भीतर इतनी डेडिकेशन थी कि एक मीटिंग अटेंड करने अपने ऑफिस गए थे। 26 अप्रैल को जब मैंने आईसीयू की खिड़की से उन्हें देखा, तो मेरे पिता का निधन हो चुका है। ठीक, 16 साल बाद पीसीएस 2024 की परीक्षा का रिजल्ट आया, तो बेटे ने पिता का मान बढ़ाते हुए रैंक 10 लाकर डिप्टी कलेक्टर यानी एसडीएम का पद हासिल कर लिया था। जी हां, यह कहानी है आयुष पांडे की, जो आज भी कई लोगों को प्रेरित करती है। भले ही पिता पीसीएस अधिकारी थे, लेकिन आयुष के लिए एसडीएम बनना आसान नहीं था। इससे पहले वो लगातार 3 बार प्रीलिम्स निकालने में असफल हो गए थे। जिससे लोगों ने ताने मारने शुरू कर दिए। लेकिन उन्होंने तानों की अपनी ता...