बोकारो, अप्रैल 29 -- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों के खिलाफ आंदोलनों का जो दौर शुरू होता है, उसे जनहित से अधिक निहित स्वार्थ और राजनीतिक जमीन तैयार करने की मंशा के रूप में देखा जा रहा है। बोकारो सहित पूरे झारखंड का शिक्षा जगत इन दिनों आहत दिख रहा है। हाल ही में शहर के एक प्रतिष्ठित निजी विद्यालय की कैंटीन पर हुई विवादास्पद छापेमारी ने आग में घी डालने का काम किया है। राज्य के एजुकेशनल हब के रूप में विख्यात बोकारो की शैक्षणिक साख पर इस हमले के बाद शिक्षाविद गोलबंद होते दिख रहे हैं। उन्होंने इसे लेकर न केवल चिंता जताई, बल्कि इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आक्रोश भी व्यक्त किया है। कहा कि जान बूझकर प्राइवेट स्कूलों को सॉफ्ट टारगेट बनाया जा रहा है। नगर के सेक्टर-5 स्थित एक बड़े स्कूल के प्राचार्य ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए क...