भागलपुर, फरवरी 11 -- कजरा। जिले से लेकर प्रखंड एवं संकुल संसाधन केंद्र स्तर तक शिक्षा विभाग द्वारा समय-समय पर शिक्षकों और विद्यालय प्रधानों के लिए प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य पठन-पाठन की गुणवत्ता में सुधार, विद्यालय प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना तथा शैक्षणिक कमियों को दूर करना होता है। कार्यशालाओं में नवाचार, शिक्षण तकनीक, मूल्यांकन पद्धति और प्रशासनिक सुधार जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाती है। हालांकि जमीनी स्तर पर इन प्रशिक्षणों का अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं देता। कार्यशाला समाप्त होते ही अधिकांश विद्यालयों में पुरानी कार्यप्रणाली ही जारी रहती है। न तो शिक्षण पद्धति में ठोस बदलाव नजर आता है और न ही प्रबंधन में सुधार। इससे विभागीय प्रयासों पर प्रश्नचिह्न लगने लगा है। शिक्षा के क्षेत्र में ...
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