भागलपुर, मार्च 11 -- लखीसराय, एक प्रतिनिधि। जिले में धान खरीद और उससे तैयार होने वाले कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) को लेकर प्रशासन ने निगरानी और सख्त कर दी है। धान मिलिंग में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए अब प्रशासन ने नया तरीका अपनाया है। मिलरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बिजली बिल का सहारा लिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से जिले के सभी निबंधित राइस मिलरों से बिजली खपत की विस्तृत रिपोर्ट मांगी जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मिलों में कितनी मात्रा में धान की मिलिंग हुई और उससे कितना सीएमआर तैयार किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार धान की मिलिंग में मशीनों के संचालन के दौरान बिजली की खपत का एक तय मानक होता है। इसी मानक के आधार पर मिलों में इस्तेमाल हुई बिजली की यूनिट से यह अनुमान लगाया जाएगा कि किस मिल में वास्तव में...
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