अलीगढ़, जून 20 -- अकराबाद, संवाददाता। गांव लधौआ स्थित चीनी मिल परिसर में आयोजित श्रीराम कथा एवं 108 कुण्डीय महायज्ञ के छठवें दिवस कथा व्यास जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने भगवान श्रीराम की वन लीला का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि वनवास केवल राजमहल का त्याग नहीं था, बल्कि धर्म, मर्यादा, त्याग, सेवा और लोककल्याण की स्थापना का महान संकल्प था। प्रभु श्रीराम ने वन में ऋषि-मुनियों की रक्षा कर धर्म की पुनः प्रतिष्ठा की और मानवता को आदर्श जीवन का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने लक्ष्मण जी के अतुलनीय सेवा-भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि लक्ष्मण जी ने वनवास के 14 वर्षों में स्वयं को पूरी तरह श्रीराम और माता सीता की सेवा में समर्पित कर दिया। जब भी प्रभु श्रीराम को पादुका की आवश्यकता होती, लक्ष्मण जी पादुका लाकर नहीं देते थे, बल...