लखनऊ, अप्रैल 12 -- उन्नत चिकित्सा पद्धतियां रोगों की जल्द पहचान और बेहतर उपचार में सहायक हैं। साथ ही लोगों में लक्षणों की समय पर पहचान, प्रदूषण से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता भी जरूरी है। ये बातें केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के रेस्पिवॉक 2026 सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार कहीं। ऑर्गनाइजेशन फॉर कांसर्नवेशन ऑफ एंवारंमेंट एंड नेचर (ओशन) के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सामुदायिक जागरूकता और जन भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के कई शहर, विशेषकर दिल्ली और लखनऊ लगातार अत्यधिक वायु प्रदूषण की चपेट में हैं। यहां का हर व्यक्ति अनजाने में विषैली हवा में सांस ले रहा है। इसका सीधा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
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