प्रयागराज, फरवरी 23 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि पढ़े-लिखे दो बालिगों के बीच लंबे समय तक कायम शारीरिक संबंध, शादी का वादा पूरा न करने का अपराध नहीं है। ऐसे में आपराधिक केस जारी रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने बस्ती कोतवाली के श्याम बहादुर यादव की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। इसी के साथ कोर्ट ने याची के खिलाफ आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही, चार्जशीट व सम्मन आदेश रद्द कर दिया है। अधिवक्ता आदित्य गुप्ता व वरिष्ठ अधिवक्ता ने बहस की। कोर्ट ने कहा कि स्वीकृत तथ्य है कि पीड़िता व आरोपी दोनों 2016 से एक-दूसरे को जानते हैं। 2019 से शादी के वादे पर शारीरिक संबंध बनाए। संबंध 2019 से 2025 तक संबंध कायम रहा। 2020 में दो बार गर्भपात भी कराया गया। परिवार शादी को राजी था। पीड़िता जिला अस्पता...
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