प्रयागराज, जुलाई 11 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे हों और उनका वैवाहिक संबंध अन्य परिस्थितियों से स्थापित होता हो, तो भरण-पोषण के दावे को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि वैध विवाह का ठोस दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। न्यायमूर्ति अचल सचदेव ने यह टिप्पणी महाराजगंज फैमिली कोर्ट के उस आदेश को आंशिक रूप से रद्द करते हुए की, जिसमें महिला की भरण-पोषण याचिका केवल इसलिए खारिज कर दी गई थी क्योंकि वह स्वयं को विधिक रूप से विवाहित पत्नी साबित करने वाले दस्तावेज पेश नहीं कर सकी थी। महिला ने अपनी याचिका में कहा था कि वर्ष 2017 में दोनों ने कोर्ट मैरिज के लिए आवेदन किया था। इसके बाद वह पति के साथ रहने लगी और उनके संबंध से एक पुत्र का जन्म हुआ। यह...