मुजफ्फरपुर, जून 3 -- मुजफ्फरपुर। जिले के असंगठित दिहाड़ी मजदूरों का हाल रोज कुआं खोदना और पानी पीने जैसा है। काम मिला तो घर का चूल्हा जला, नहीं तो भूखे पेट सोने की नौबत रहती है। तंगहाली में जी रहे इन मजदूरों की नाराजगी शोषण करने वाले ठेकेदारों से तो है ही, उन प्रशासनिक अधिकारियों से भी है, जो इनके लिए संचालित योजनाएं इन तक पहुंचाने के प्रति लापरवाह हैं। कोल्हुआ पैगंबरपुर, भगवानपुर चौक, कच्ची-पक्की, पानी टंकी चौक, सरैयागंज टावर, पक्की सराय और जीरोमाइल सहित प्रमुख चौक पर हर सुबह जहां ये जुटते हैं, उस जगह को आपस में लेबर चौक बोलते हैं। काम की आस में यहां घंटों खड़े रहने वाले इन मजदूरों का कहना है कि इनके लिए चौराहों पर शेड का इंतजाम भी नहीं है, जहां ये गर्मी और बरसात में सिर छिपा सकें। अधिकतर मजदूरों ने बताया कि उनके पास श्रमिक कार्ड नहीं है...