संतकबीरनगर, फरवरी 27 -- संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि माह-ए-रमजान का रोजा महज एक धार्मिक फर्ज नहीं बल्कि इंसानियत, सब्र व सेहत का संदेश भी देता है। इस्लामिक कैलेंडर के नौवें महीने रमजान में रखे जाने वाले रोजे इंसान को भूख-प्यास के जरिए आत्म संयम व संवेदनशीलता का पाठ पढ़ाते हैं। 13 घंटे भूखे रहने से कई बिमारियों से छुटकारा मिलता है। माह-ए-रमजान बेहतर स्वास्थ्य, सब्र व अनुशासन की सीख देता है। सामाजिक बुराइयों से रोकता है। मानवता की भावना को विकसित करता है। सेमरियावां स्थित मदनी मस्जिद के इमाम हाफिज व कारी नसीरुद्दीन ने कहा कि इस्लाम धर्म में हर कार्य मानवता का संदेश देता है। दुनिया में बहुत से धनवानों को भूख व प्यास के दर्द का एहसास नहीं होता है। मगर रमाजान में रोजा रखने से भूख व प्यास का एस...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.