शामली, मई 30 -- कैराना। हांगकांग में आयोजित अंडर-20 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 100 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीतकर गांव पावटी कला का नाम विश्वभर में रोशन करने वाली निपम ने सफलता यूं ही अर्जित नहीं की। यह उसकी कड़ी मेहनत और जज्बा है। घर हो या स्टेडियम वह सुबह चार बजे प्रैक्टिस में लग जाती। यह उसकी दिनचर्या में शामिल है। निपम राष्ट्रीय टीम चार गुना 100 मीटर रिले टीम की सदस्य भी हैं। गांव पावटीकलां के किसान शिवकुमार की बेटी निपम बचपन से ही खेलों के प्रति गंभीर रही। पिता शिवकुमार बताते हैं कि स्थानीय प्रतियोगिताओं में लगातार पदक जीतने के बाद उन्हें एहसास हो गया था कि बेटी में कुछ अलग करने का जज्बा है। गांव में दौड़ के लिए ट्रैक या मैदान नहीं था, इसके बावजूद निपम रोजाना सुबह चार बजे उठकर अभ्यास के लिए जाती थी। पिता ने उसे प्रैक्टिस के लिए मु...