रोजगार नहीं मिला तो वनोपज को सहारा बनाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे बासाडेरा के ग्रामीण
घाटशिला, जून 2 -- घाटशिला। झारखंड के ग्रामीण इलाकों में आज भी बड़ी संख्या में लोग बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में वनोपज ही उनके लिए आजीविका का प्रमुख साधन बना हुआ है। विशेषकर महिलाएं इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसका उदाहरण घाटशिला प्रखंड की कालचित्ती पंचायत के अति सुदूरवर्ती बासाडेरा गांव में देखने को मिलता है। यहां गांव के अधिकांश पुरुष और महिलाएं वनोपज पर निर्भर हैं। गर्मी के मौसम में महिलाएं जंगलों से महुआ के फल एकत्रित कर घर लाती हैं। इसके बाद उन्हें सुखाया जाता है, छिलका निकाला जाता है और फिर तेल निकालने की प्रक्रिया की जाती है।
महुआ फल संग्रहण की प्रक्रिया बासाडेरा गांव निवासी 60 वर्षीय बाबूलाल सिंह बताते हैं कि पूरा परिवार महुआ के फल संग्रह करने में 15 से 20 दिनों तक जुटा रहता है। यदि मौसम अनुकूल रहा त...
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