रोजगार की तलाश में गया लालचंद का आया शव
गिरडीह, अगस्त 5 -- बगोदर, प्रतिनिधि। घर में खुशहाली लाने का सपना लेकर इसी साल दुबई गया था तिरला गांव का लालचंद महतो। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। वीजा गुम हो गया। कंपनी ने निकाल दिया और 5 जुलाई को एक पेड़ के नीचे बेसहारा हालत में उसने अंतिम सांस ले ली। लगभग एक महीने में मंगलवार को जब उसका शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया। बूढ़ी मां-बेटे की लाश से लिपट कर बिलख रही थी। पत्नी एक बार बोला ना... कहकर बेहोश हो जा रही थी। बेटा-बेटी की आंसू रुक नहीं रहे थे। पूरे गांव की आंखें नम थीं। माहौल ऐसा कि परिजनों का चित्कार सुनकर पत्थर का दिल भी पिघल जाए। यह भी पढ़ें- बेटे का शव मंगाने के लिए मां ने 40 हजार में बंधक रखा खेतखुद आया सामने फरिश्ता इस मुश्किल घड़ी में तिरला की मुखिया सरिता साव फरिश्ता बनकर सामने आईं। वे खुद परिजनों के साथ कोलकाता गईं। एंबुले...
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