गया, दिसम्बर 30 -- जिले में कड़ाके की ठंड के कारण जनजीवन प्रभावित है। घरों में भी लोग ब्लोअर के सामने से हटाना नहीं चाह रहे हैं। ऐसे मौसम में भी रात में रिक्शा चालक, भीख मांगने वाले या मजदूर खुले में सड़क किनारे सो रहे हैं, जबकि रैन बसेरे में बिस्तर खाली रह जा रहे हैं। ऐसे लोगों को रात गुजारने के लिए शहर में छह रैन बसेरे हैं। बावजूद लोग सड़क पर सोते किनारे सो रहे हैं। इसका मुख्य कारण लोगों को इसके बारे में जानकारी का अभाव है। 110 लोगों को रैन बसेरा में सोने के लिए लगे हैं बेड शहर के गांधी मैदान के सामने चार, एक पंचायती अखाड़ा और एक बैरागी डाक स्थान मोड पर रेन बसेरा बना है। बैरागी डाक स्थान मोड पर बनाए गए रंग बसेरा में 50 लोगों को ठहरने की सुविधा है। जरूरत पड़ने पर यहां 30 अतिरिक्त बेड भी लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा पांच रैन बसेरे में प्र...
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