गया, दिसम्बर 8 -- शहर के गांधी मैदान के सामने रैन बसेरा एक में रात गुजारने के लिए पर्याप्त साधन नहीं है। कई तरह की समस्याओं का डेरा है। एक पतला कंबल से रात की ठंड गुजराना मुश्किल हो रहा है। दो-तीन को एक साथ ओढ़ने के बाद भी गया की ठंड से राहत की उम्मीद नहीं है। मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी तो है। लेकिन, वह भी कई जगह फटी हुयी है। पेयजल की व्यवस्था नहीं है। लोगों को पानी दूसरी जगह से लाना पड़ रहा है। शौचालय के मुख्य दरबाजे के पास ही गंदगी ऐसी की अंदर नहीं जा सकते हैं। नगर निगम प्रशासन का रैन बसेरा पर ध्यान नहीं है। ठंड बढ़ने के साथ रैन बसेरों में ठहरने वाले गरीब-गुरबों की संख्या बढ़ रही है। 12 में दो बेड टूटे हैं शहर के गांधी मैदान से उत्तर रैन बसेरा नंबर- 1 में 12 बेड हैं। लेकिन, यहां दो बेड महीनों से टूटे हैं। 10 बेड है। लेकिन, कंबल नौ बेड प...
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